मंगलवार, 28 सितंबर 2010

शरीर पर तिल होने का फल

माथे पर———बलवान हो
ठुड्डी पर——–स्त्री से प्रेम न रहे दोनों बांहों के बीच–यात्रा होती रहे
दाहिनी आंख पर—-स्त्री से प्रेम
बायीं आंख पर—–स्त्री से कलह रहे
दाहिनी गाल पर—–धनवान हो
बायीं गाल पर——खर्च बढता जाए
होंठ पर———-विषय-वासना में रत रहे
कान पर———-अल्पायु हो
गर्दन पर———-आराम मिले
दाहिनी भुजा पर—–मान-प्रतिष्ठा मिले
बायीं भुजा पर——झगडालू होना
नाक पर———-यात्रा होती रहे
दाहिनी छाती पर—–स्त्री से प्रेम रहे
बायीं छाती पर——स्त्री से झगडा होना
कमर में———–आयु परेशानी से गुजरे
दोनों छाती के बीच—-जीवन सुखी रहे
पेट पर———-उत्तम भोजन का इच्छुक
पीठ पर———प्राय: यात्रा में रहा करे
दाहिने हथेली पर——बलवान हो
बायीं हथेली पर——खूब खर्च करे
दाहिने हाथ की पीठ पर–धनवान हो
बाएं हाथ की पीठ पर—कम खर्च करे
दाहिने पैर में———बुद्धिमान हो
बाएं पैर में———-खर्च अधिक हो
__________________

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें